Delhi Gang rape Case In India Dedicated to The Rape Victim

This Hindi poem on women’s plight was written in anger. It reflects the condition and anger after a number of rapes in India (December 2012 gang rape in Delhi, 5-year-old Gudiy rape case  and so many others). This poem is for anyone looking for a poem on women, the rape culture in India, the male psyche, the condition of society and anybody looking for a poem on women (aurat, mard), poem on women’s empowerment in India, hindi poem, slogan, rhymes on the girl child or women. There is a reference to a statement of MP Sharad Yadav in the poem (who said in Parliament that there was no boy in India who had not followed a girl

Delhi Gang rape Case In India Dedicated to The Rape Victim

मैं औरत हूँ
मैं खतरों से घिरी हूँ
मैं जंजालों में पड़ी हूँ
मत ये पूछो मुझसे कि
मैं किस तरह पली-बढ़ी हूँ
कदम-कदम पे, चप्पे-चप्पे पे
हर रास्ते पे, गली कूचों में
हर जगह ‘मर्द’ बैठे हैं
इन्तेजार में |
कि कब मैं वहाँ से गुजरूँ
और उनको रंगीन कर जाऊं
उनकी बोरियत भरी जिंदगी को
कुछ हसीन कर जाऊं |
उनको ये मजाक लगता है
औरत का पीछा करना,
‘रोमांस’ लगता है |
वो खुद ही कहते हैं कि
शायद कोई मर्द नहीं जिसने
औरत का पीछा न किया हो
उन्हें एहसास ही नहीं
कि कोई औरत नहीं है देश में
जो कभी सुकून से जी सकी हो —
रास्तों में अकेले चलते हुए
चैन की सांस ले घूम सकी हो
ट्रेन, बस या चौराहों में
मर्दों की तरह बेफिक्र रह सकी हो |
बहुत कुछ होता है एक औरत में
सिर्फ शरीर और मांस नहीं होता
औरत को देख के लार टपकाना,
पीछा करना रोमांस नहीं होता |
हर वक़्त उसे डर है
खतरा उसके चारों ओर है
जाने कब कौन खुद को उसपे थोप देगा
फिर गला घोंट देगा
या फिर छलनी कर के
कंक्रीट के जंगलों में बुत बने
इंसानों के समाज को सौंप देगा |
पांच साल की बच्ची हो या
अस्सी साल की बुढिया
मर्द कर रहे हैं सबका शिकार
कहीं मार रहे हैं सीटी
कही कर रहे बलात्कार |
औरतों का जीवन नरक कर दिया है
ये कौन सा समाज बना रहे हैं हम
सुधारो खुद को, थोड़ा तो सोचो
और आँख नहीं खुल रही हो
तो अपनी माँ-बहन से पूछो |

 

Delhi Gang rape Case In India Dedicated to The Rape Victim

Damini

sunti thi dadi ke mukh se veero ki amar kahaani ,
aisa hi ek afsaana banke duniya chhod chali me
maa ke aanchal ka sukoon ab kaha se me paaungi
uske aasu ke tale hi duniya chhod chali me.
bhagwaan ki reet he aisi, ya allah ki marzi thi
zindagi jeene se pehle ye duniya chhod chali me

 

tham rahi he saaase, kab tak ladu ab khud se
jab duniya saath thi mere tab duniya chhod chali me
yu zaaye na hone dena, jo aawaz uthi he logo
tum par hi bharosa rakh kar ye duniya chhod chali me

 

ye dard sahe na ab koi, na dehshat rahe dilo me
aisi hi ek aas liye ye duniya chhod chali me
ye tan jo saath deta to dil bhi lad leta mera
maut se nidar hokar ye duniya chhod chali me

 

door falak pe dekho, me chamak rahi tara banke
andher nagriyo se bhari ye duniya chhod chali me
ab papa ko naaz hoga. ab insaaf ka sath hoga
duniya ko ek banaake ab sabse door chali me

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *